Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
संयम

गृद्धयै हुङ्गरादि संज्ञा, सङ्क्लेशं च पुरोऽनु च। मुञ्चन् मौनमदन कुर्यात्, तपः संयम वृंहणं।।

भोजन में लालसा के कारण हुङ्कार आदि सङ्केत नहीं करना, भोजन के आगे–पीछे संक्लेश नहीं करना, मौन पूर्वक भोजन करने से तप और संयम की वृद्धि होती है।

One should not make gestures like grunts out of craving for food, nor feel distress before or after eating; eating in silence increases austerity and self-restraint.

— आराध्य सूत्र · #3

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मनुष्य का शरीर रथ है, बुद्धि सारथी है और इन्द्रियाँ इसके घोड़े हैं। इसको वश में करके साधना करने वाला चतुर एवं धीर पुरुष काबू में किए हुए घोड़ों से सारथी की भाँति सुखपूर्वक यात्रा करता है।
संयम