अजल्पन्तो गुणान् वाण्या, जल्पन्त श्चेष्टया पुनः। भवन्ति पुरुषाः पुंसां, गुणिनामुपरि स्फुटं।।
जो वचनों से न कह कर चेष्टा से अपने गुणों का बखान करता है वह गुणवानों में भी श्रेष्ठ माना जाता है।
One who proclaims his virtues not by words but by his conduct is counted the finest even among the virtuous.
— आराध्य सूत्र · #20
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