Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
धन

कडार पिञ्ज– कडार पिञ्ज चोरी की हुई सोने की शलाकाएँ खरीदता था, एक दिन वह अपनी लड़की के यहाँ गया और लड़के से बोल गया कि शलाकाएँ ले लेना, लड़के ने चोरी की जानकर नहीं ली। पिता लड़की के यहाँ से वापस आया शलाकाएँ न देख कर अपने पैर काट लिये और मरकर अपने ही खजाने में सर्प बनकर रक्षा करने लगा, लड़के ने देखा तो उस सर्प को मार डाला, सर्प मरकर नरक में चला गया।

Kadar Pinj: Kadar Pinj used to buy stolen gold bars. One day he went to his daughter's house and told his son to accept the bars; the son, knowing they were stolen, refused. When the father returned and did not see the bars he cut off his own feet, and dying he became a serpent guarding his own treasure. When the son saw the serpent he killed it, and the serpent, dying, went to hell.

— आराध्य सूत्र · #79

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लक्ष्मी हिंडोले की तरह चंचल है। विषयों से उत्पन्न हुआ सुख अंततः दुःखप्रद है। देह विपत्ति का घर है। अत्यधिक धन मृत्यु का प्रचुर साधन है। संसार अत्यधिक शोकपूर्ण है। स्त्रियाँ अनर्थ की जड़ हैं। फिर भी लोग इस घोर संसार में ही रत रहते हैं। आत्मा में रत नहीं होते यह आश्चर्य है।
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