Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
विनम्रता

दो हाथ, दो पैर, सिर, सीना, पीठ, पुट्ठा, इन आठों अङ्गों को पाने की सार्थकता मृदुता से हो सकती है, अन्याय से नहीं।

The worth of possessing these eight limbs—two hands, two feet, head, chest, back and hips—is realized through gentleness, not through injustice.

— आराध्य सूत्र · #24

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जीवन जीने का आनंद संघर्ष में नहीं समर्पण से मिलता हैं जैसे विभीषण ने संघर्ष नहीं समर्पण किया, तो राम ने उसको लंका का राजा बना दिया, रावण ने संघर्ष किया तो मिट्टी में मिला दिया।
विनम्रता