Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
विनम्रता

अभिमानी पिता से पुत्र, पुत्र से पिता, गुरू से शिष्य, शिष्य से गुरू, स्वामी से सेवक, सेवक से स्वामी दूर हो जाते हैं, एवं विनयवान, पुत्र, शिष्य और सेवक को देख कर पिता, गुरू और स्वामी प्रसन्न होते हैं, जिनके मस्तक पर गुरु का हाथ होता है वे धन्य होते हैं।

Because of arrogance a son grows distant from his father, a father from his son, a disciple from his guru, a guru from his disciple, a servant from his master and a master from his servant; but seeing a humble son, disciple and servant, the father, guru and master are pleased—blessed are those on whose head rests the guru's hand.

— आराध्य सूत्र · #11

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जीवन जीने का आनंद संघर्ष में नहीं समर्पण से मिलता हैं जैसे विभीषण ने संघर्ष नहीं समर्पण किया, तो राम ने उसको लंका का राजा बना दिया, रावण ने संघर्ष किया तो मिट्टी में मिला दिया।
विनम्रता