Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
विनम्रता

जिससे स्वार्थ सधता है उसको भगवान मानते हैं, जिससे स्वार्थ नहीं सधता है तो भाई भी शत्रु लगता है।

Whoever serves one's self-interest is treated as God; whoever does not, even a brother seems an enemy.

— आराध्य सूत्र · #13

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जीवन जीने का आनंद संघर्ष में नहीं समर्पण से मिलता हैं जैसे विभीषण ने संघर्ष नहीं समर्पण किया, तो राम ने उसको लंका का राजा बना दिया, रावण ने संघर्ष किया तो मिट्टी में मिला दिया।
विनम्रता