Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
विनम्रता

रामचन्द्रजी ने आभार- जब रामचन्द्रजी दिग्विजय करके अयोध्या को वापस आये तब उन्होंने सब सहयोगियों के लिये कृतज्ञता ज्ञापित की, जब हनुमानजी का क्रम आया, तब रामचन्द्रजी ने कहा-हे हनुमन्त ! तुमने जो आज तक उपकार किया है उसके लिये मैं आभारी हूँ लेकिन मैं चाहता हूँ आपका उपकार न करूँ, इस वाक्य को सुनकर लोग आश्चर्य चकित हुये, किन्तु हनुमान जी बहुत प्रसन्न हुये, तब लोगों ने हनुमान जी से पूँछा आप लोगों की भाषा हम लोगों के समझ में नहीं आयी कृपया कर समाधान करें, तब हनुमान जी ने कहा कि रामचन्द्र जी यह कह रहे हैं कि आपको कभी कष्ट ही न आये।

Ramchandra's thanks: when Ramchandra returned to Ayodhya after his conquests he expressed gratitude to all his helpers. When Hanuman's turn came, he said, 'O Hanuman, I am grateful for all the help you have given, but I wish I may never need to repay your help.' People were astonished at these words, yet Hanuman was delighted. When people asked him to explain, Hanuman said, 'Ramchandra means that may you never suffer any hardship at all.'

— आराध्य सूत्र · #131

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जीवन जीने का आनंद संघर्ष में नहीं समर्पण से मिलता हैं जैसे विभीषण ने संघर्ष नहीं समर्पण किया, तो राम ने उसको लंका का राजा बना दिया, रावण ने संघर्ष किया तो मिट्टी में मिला दिया।
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