Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
दान

वैय्यावृत्ति- प्रतिकार करने में समर्थ होकर भी रोग से दुःखी सम्यग्दृष्टि की जो उपेक्षा करता है, वह पापी सम्यग्दर्शन का घाती है। जो सम्यग्दृष्टि साधर्मी की भक्ति नहीं करता, वह झूठ-मूठ का विनयी बना फिरता है।

Vaiyavritti (service): one who, though able to remedy it, neglects a right-believer suffering from illness is a sinner who destroys right-faith. A right-believer who does not serve his co-religionist merely pretends to be humble.

— आराध्य सूत्र · हरि.पु. · #12

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परोपकार में सर्वदा संलग्न रहने वाला सज्जन व्यक्ति विनाश के अवसर पर भी विनाश करने वाले से भी शत्रु भाव नहीं रखता है जैसे चन्दन का वृक्ष काटने वाले कुल्हाड़े का भी मुख सुगन्धित कर देता है।
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