Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
दान

जिसका जो धन अथवा शरीर साधर्मी जनों के उपयोग में आता है यथार्थ में वही उसका धन है, जो समर्थ होकर भी आपत्ति के समय सम्यग्दृष्टि की उपेक्षा करता है, उस कठोर हृदय की जिन शासन में क्या भक्ति हो सकती है?

Whosever wealth or body is used for the good of co-religionists, that alone is truly his wealth. One who, though capable, neglects a right-believer in time of calamity, what devotion to the Jina's teaching can such a hard-hearted person have?

— आराध्य सूत्र · #11

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परोपकार में सर्वदा संलग्न रहने वाला सज्जन व्यक्ति विनाश के अवसर पर भी विनाश करने वाले से भी शत्रु भाव नहीं रखता है जैसे चन्दन का वृक्ष काटने वाले कुल्हाड़े का भी मुख सुगन्धित कर देता है।
दान