Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
धन

धर्महानि सङ्क्लेश अति, शत्रु विनय कर होय। ऐसा धन नहीं लीजिए, भूखे रहिए सोय।।

Wealth that brings loss of dharma, great affliction, and makes you bow before an enemy — do not take such wealth; better to remain hungry.

— आराध्य सूत्र · #92

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लक्ष्मी हिंडोले की तरह चंचल है। विषयों से उत्पन्न हुआ सुख अंततः दुःखप्रद है। देह विपत्ति का घर है। अत्यधिक धन मृत्यु का प्रचुर साधन है। संसार अत्यधिक शोकपूर्ण है। स्त्रियाँ अनर्थ की जड़ हैं। फिर भी लोग इस घोर संसार में ही रत रहते हैं। आत्मा में रत नहीं होते यह आश्चर्य है।
धन