Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
दान

जिसके कर-कमल में दानरूपी अमृत है, मुख कमल में वचन रुपी अमृत है, हृदय कमल में दया रुपी अमृत है वह मनुष्य किस को प्रिय नहीं होता है? अर्थात् सभी को प्रिय होता है।

One in whose lotus-hands is the nectar of charity, on whose lotus-mouth is the nectar of speech, and in whose lotus-heart is the nectar of compassion — to whom is such a person not dear? That is, he is dear to all.

— आराध्य सूत्र · #38

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परोपकार में सर्वदा संलग्न रहने वाला सज्जन व्यक्ति विनाश के अवसर पर भी विनाश करने वाले से भी शत्रु भाव नहीं रखता है जैसे चन्दन का वृक्ष काटने वाले कुल्हाड़े का भी मुख सुगन्धित कर देता है।
दान