Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
संयम

पञ्चेंद्रिय के विषय शत्रु हैं तथा जो धर्म, दान, हितकारी तप एवं दीक्षा आदि के ग्रहण करने का निषेध करता है वह व्यक्ति भी शत्रु है।

The objects of the five senses are enemies, and one who forbids the taking up of dharma, charity, beneficial austerity, initiation and the like is also an enemy.

— आराध्य सूत्र · #36

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मनुष्य का शरीर रथ है, बुद्धि सारथी है और इन्द्रियाँ इसके घोड़े हैं। इसको वश में करके साधना करने वाला चतुर एवं धीर पुरुष काबू में किए हुए घोड़ों से सारथी की भाँति सुखपूर्वक यात्रा करता है।
संयम