Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
संयम

स्वाध्याय अभ्यासी साधु पञ्चेन्द्रिय विजेता, संकल्प-विकल्प का त्यागी, त्रिगुप्ति युक्त, क्षण भर में अनन्त कर्मों का नाश करने वाला होता है, साधु जीवन में अन्य-अन्य कर्तव्यों के साथ स्वाध्याय का विशेष महत्त्व है।

A monk who practises self-study conquers the five senses, renounces mental vacillation, is endowed with the three guptis, and destroys infinite karmas in a moment; among a monk's many duties, self-study holds special importance.

— आराध्य सूत्र · #20

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मनुष्य का शरीर रथ है, बुद्धि सारथी है और इन्द्रियाँ इसके घोड़े हैं। इसको वश में करके साधना करने वाला चतुर एवं धीर पुरुष काबू में किए हुए घोड़ों से सारथी की भाँति सुखपूर्वक यात्रा करता है।
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