Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
धन

जो धन पाप रहित निष्कलंक रूप से प्राप्त किया जाता है, उससे धर्म, काम और आनन्द का स्रोत बह निकलता है।

From wealth acquired without sin and in a spotless manner, a stream of dharma, fulfilment of desires and joy flows forth.

— आराध्य सूत्र · #5652

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लक्ष्मी हिंडोले की तरह चंचल है। विषयों से उत्पन्न हुआ सुख अंततः दुःखप्रद है। देह विपत्ति का घर है। अत्यधिक धन मृत्यु का प्रचुर साधन है। संसार अत्यधिक शोकपूर्ण है। स्त्रियाँ अनर्थ की जड़ हैं। फिर भी लोग इस घोर संसार में ही रत रहते हैं। आत्मा में रत नहीं होते यह आश्चर्य है।
धन