धन सम्पत्ति समाज की समस्त शक्तियों की उपज है। Wealth is the product of all the collective powers of society. — आराध्य सूत्र · #5081 0 – भेजें 🖼️ इमेज सेव करें · Save image card
लक्ष्मी हिंडोले की तरह चंचल है। विषयों से उत्पन्न हुआ सुख अंततः दुःखप्रद है। देह विपत्ति का घर है। अत्यधिक धन मृत्यु का प्रचुर साधन है। संसार अत्यधिक शोकपूर्ण है। स्त्रियाँ अनर्थ की जड़ हैं। फिर भी लोग इस घोर संसार में ही रत रहते हैं। आत्मा में रत नहीं होते यह आश्चर्य है। धन 0 – भेजें
मनुष्य धन के अभाव में इतना कष्ट नहीं पाता, जितना अपने फिजूल खर्चों के कारण कष्ट पाता है। धन 0 – भेजें
इंसान होता है प्यार करने के लिए और पैसा होता है उपयोग करने के लिए किन्तु लोग प्यार पैसों से करते और उपयोग इंसान का करते हैं। धन 0 – भेजें
जो पुरुष न्याय की बात को समझता है और दूसरों की वस्तुओं को लेना नहीं चाहता लक्ष्मी श्रेष्ठता को जानती है और उसे ढूँढ़ती हुई उसके घर आती है। धन 0 – भेजें
जो लोग धन उपार्जन के लिए सदा हाय-हाय करते फिरते हैं पर यश प्राप्त करने की परवाह नहीं करते उनका अस्तित्व पृथ्वी के लिए केवल भार स्वरूप है। धन 0 – भेजें