Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
संयम

वैसे तो सभी इन्द्रियज्ञान प्रायः समता के बाधक हैं किन्तु आँख द्वारा अवलोकन अधिक बाधक है अतः नेत्रोपयोग निजचर्या में ही करो यथा लिखने में, पढ़ने में, चलने में, उठने–बैठने में, चीज उठाने रखने में, दर्शन में, पूजन में, वंदन में, वैय्यावृत्य में, भोजन में, धर्मात्माओं से वार्तालाप में, दुखियों को समझाने में और नित्य क्रिया में।

Though all sense-knowledge tends to obstruct equanimity, seeing with the eyes obstructs most; so use the eyes only in your own necessary activities, such as writing, reading, walking, sitting and rising, handling objects, darshan, worship, salutation, service, eating, conversing with the pious, consoling the suffering, and daily duties.

— आराध्य सूत्र · #4963

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मनुष्य का शरीर रथ है, बुद्धि सारथी है और इन्द्रियाँ इसके घोड़े हैं। इसको वश में करके साधना करने वाला चतुर एवं धीर पुरुष काबू में किए हुए घोड़ों से सारथी की भाँति सुखपूर्वक यात्रा करता है।
संयम