Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
दान

जो पुरुष अतिथियों की सेवा करता है वह देवताओं का सुप्रिय अतिथि बनता है।

The man who serves his guests becomes a beloved guest of the gods.

— आराध्य सूत्र · #4618

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परोपकार में सर्वदा संलग्न रहने वाला सज्जन व्यक्ति विनाश के अवसर पर भी विनाश करने वाले से भी शत्रु भाव नहीं रखता है जैसे चन्दन का वृक्ष काटने वाले कुल्हाड़े का भी मुख सुगन्धित कर देता है।
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