Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
दान

हम अतिथि सेवा के माहात्म्य का वर्णन नहीं कर सकते कि उसमें कितना पुण्य है क्योंकि अतिथि सेवा का महत्त्व तो अतिथि की योग्यता पर निर्भर है।

We cannot describe the glory of serving a guest or how much merit lies in it, for the worth of guest-service depends on the worthiness of the guest.

— आराध्य सूत्र · #4482

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परोपकार में सर्वदा संलग्न रहने वाला सज्जन व्यक्ति विनाश के अवसर पर भी विनाश करने वाले से भी शत्रु भाव नहीं रखता है जैसे चन्दन का वृक्ष काटने वाले कुल्हाड़े का भी मुख सुगन्धित कर देता है।
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