Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
दान

तृण तुल्य भी उपकार क्यों न हो, उसके फल को समझने वाले उसे ताड़ के समान मानेंगे।

However straw-like a favour may be, those who understand its fruit will regard it as tall as a palm tree.

— आराध्य सूत्र · #4458

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परोपकार में सर्वदा संलग्न रहने वाला सज्जन व्यक्ति विनाश के अवसर पर भी विनाश करने वाले से भी शत्रु भाव नहीं रखता है जैसे चन्दन का वृक्ष काटने वाले कुल्हाड़े का भी मुख सुगन्धित कर देता है।
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