Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
दान

बंधुभाव से की हुई सेवा की अपेक्षा आत्मभाव से की हुई सेवा उत्तम है।

Service done in a spirit of kinship is good, but service done in a spirit of oneness of soul is better.

— आराध्य सूत्र · #4384

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परोपकार में सर्वदा संलग्न रहने वाला सज्जन व्यक्ति विनाश के अवसर पर भी विनाश करने वाले से भी शत्रु भाव नहीं रखता है जैसे चन्दन का वृक्ष काटने वाले कुल्हाड़े का भी मुख सुगन्धित कर देता है।
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