Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
दान

सेवा करने वाले के हाथ स्तुति करने वाले के मुँह से अधिक पवित्र होते हैं।

The hands of one who serves are purer than the mouth of one who merely praises.

— आराध्य सूत्र · #4367

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परोपकार में सर्वदा संलग्न रहने वाला सज्जन व्यक्ति विनाश के अवसर पर भी विनाश करने वाले से भी शत्रु भाव नहीं रखता है जैसे चन्दन का वृक्ष काटने वाले कुल्हाड़े का भी मुख सुगन्धित कर देता है।
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