Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
धन

कर्जे में डूबा कोई भी व्यक्ति मानसिक शान्ति का दावा नहीं कर सकता है। आप एक बार कर्ज लेंगे, परन्तु कर्ज बार-बार आपकी चेतना पर हावी हो जाएगा और आप महसूस करेंगे कि आप अपने ही मालिक नहीं रहे हैं।

No one sunk in debt can claim peace of mind. You take a loan once, but the debt dominates your consciousness again and again, and you feel you are no longer master of yourself.

— आराध्य सूत्र · #2623

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लक्ष्मी हिंडोले की तरह चंचल है। विषयों से उत्पन्न हुआ सुख अंततः दुःखप्रद है। देह विपत्ति का घर है। अत्यधिक धन मृत्यु का प्रचुर साधन है। संसार अत्यधिक शोकपूर्ण है। स्त्रियाँ अनर्थ की जड़ हैं। फिर भी लोग इस घोर संसार में ही रत रहते हैं। आत्मा में रत नहीं होते यह आश्चर्य है।
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