Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
विनम्रता

स्वार्थ और अभिमान-इन दो चीजों से स्वभाव बिगड़ता है अतः साधक को स्वार्थ और अभिमान का सर्वथा त्याग कर देना चाहिए।

Selfishness and pride — these two spoil one's nature; therefore a seeker should wholly abandon both.

— आराध्य सूत्र · #2465

इसी विषय के और सूत्र

सभी विनम्रता →
जीवन जीने का आनंद संघर्ष में नहीं समर्पण से मिलता हैं जैसे विभीषण ने संघर्ष नहीं समर्पण किया, तो राम ने उसको लंका का राजा बना दिया, रावण ने संघर्ष किया तो मिट्टी में मिला दिया।
विनम्रता