Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
दान

मनुष्य का स्वभाव होता है कि जब वह दूसरे पर दया करता है तो वह चाहता है कि याचक पूरी तरह विनम्र होकर उसे स्वीकार करे, अगर याचक दान लेने में कहीं भी स्वाभिमान दिखलाता है तो आदमी अपनी दानव वृत्ति और दयाभाव भूलकर नृशंसता से उसके स्वाभिमान को कुचलने में व्यस्त हो जाता है।

It is human nature that when a man shows mercy he wants the beggar to accept it in complete humility; if the beggar shows any self-respect while receiving charity, the giver forgets his generous, compassionate spirit and busies himself cruelly crushing that self-respect.

— आराध्य सूत्र · #2441

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परोपकार में सर्वदा संलग्न रहने वाला सज्जन व्यक्ति विनाश के अवसर पर भी विनाश करने वाले से भी शत्रु भाव नहीं रखता है जैसे चन्दन का वृक्ष काटने वाले कुल्हाड़े का भी मुख सुगन्धित कर देता है।
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