Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
संयम

जो व्यक्ति अपनी वाणी, मन, क्रोध, जिह्वा, उदर और लिंग; इन छह के वेग को जीत लेता है, वही धीर कहलाता है, उसी को पूरी पृथ्वी पर शिष्य बनाने का अधिकार है अर्थात् वही गुरु बनने योग्य है।

The person who conquers the urges of these six — speech, mind, anger, tongue, stomach and sex organ — is called steadfast; he alone has the right to make disciples on the whole earth, that is, he alone is fit to be a guru.

— आराध्य सूत्र · #2109

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मनुष्य का शरीर रथ है, बुद्धि सारथी है और इन्द्रियाँ इसके घोड़े हैं। इसको वश में करके साधना करने वाला चतुर एवं धीर पुरुष काबू में किए हुए घोड़ों से सारथी की भाँति सुखपूर्वक यात्रा करता है।
संयम