Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
दान

न्यायपूर्वक उपार्जित हुए धन के दो ही दुरुपयोग समझने चाहिए, अपात्र को देना और सत्पात्र को न देना।

There are only two misuses of justly earned wealth: giving to the unworthy and not giving to the worthy.

— आराध्य सूत्र · #1939

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परोपकार में सर्वदा संलग्न रहने वाला सज्जन व्यक्ति विनाश के अवसर पर भी विनाश करने वाले से भी शत्रु भाव नहीं रखता है जैसे चन्दन का वृक्ष काटने वाले कुल्हाड़े का भी मुख सुगन्धित कर देता है।
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