Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
दान

जिस प्रकार स्वाति नक्षत्र में उत्पन्न नीर यदि सीप में जाता है तो वह मोती बन जाता है और सर्प के मुख में जाता है तो विष बन जाता है, उसी प्रकार पात्र-अपात्र में दिया दान भी जानना चाहिए।

Just as a raindrop of the Svati constellation becomes a pearl if it falls into an oyster and poison if it falls into a snake's mouth, so too should one understand charity given to the worthy versus the unworthy.

— आराध्य सूत्र · #1909

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परोपकार में सर्वदा संलग्न रहने वाला सज्जन व्यक्ति विनाश के अवसर पर भी विनाश करने वाले से भी शत्रु भाव नहीं रखता है जैसे चन्दन का वृक्ष काटने वाले कुल्हाड़े का भी मुख सुगन्धित कर देता है।
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