दूसरे की प्रसन्नता से मिली हुई वस्तु दूध के समान है, माँगकर ली हुई वस्तु पानी के समान है और दूसरे का दिल दुःखाकर ली हुई वस्तु रक्त के समान है।
A thing received from another's gladness is like milk, a thing taken by asking is like water, and a thing taken by grieving another's heart is like blood.
— आराध्य सूत्र · #1945
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