Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
संयम

सिद्धालय में बैठने वाला मन व इन्द्रियों को वश में न करने के कारण संसार में भटक रहा है। वन्दनीय की वंदना किए बिना स्वयं वंदनीय नहीं हो सकते।

One fit to sit in the abode of the liberated wanders in the world because he has not controlled his mind and senses. Without venerating the venerable, one cannot become venerable oneself.

— आराध्य सूत्र · #704

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मनुष्य का शरीर रथ है, बुद्धि सारथी है और इन्द्रियाँ इसके घोड़े हैं। इसको वश में करके साधना करने वाला चतुर एवं धीर पुरुष काबू में किए हुए घोड़ों से सारथी की भाँति सुखपूर्वक यात्रा करता है।
संयम