Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
संयम

गृहस्थों के चक्र में न पड़ना तथा निरपेक्ष त्यागी रहना, पत्थर पर सोना पर चटाई न माँगना, लँगोटी न मिले तो द्रव्य मुनि ही बन जाना, पर लगोटी न माँगना, सूखी रोटी मिल जावे तो खा लेना, पर घी की इच्छा न करना आदि, आत्म निर्मलता में ही तुम्हारा कल्याण है।

Do not fall into the circle of householders and remain an independent renunciant; sleep on stone but do not ask for a mat; if a loincloth is not had, become a naked ascetic but do not beg a loincloth; if dry bread is had, eat it but do not desire ghee — your welfare lies only in purity of the soul.

— आराध्य सूत्र · #444

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मनुष्य का शरीर रथ है, बुद्धि सारथी है और इन्द्रियाँ इसके घोड़े हैं। इसको वश में करके साधना करने वाला चतुर एवं धीर पुरुष काबू में किए हुए घोड़ों से सारथी की भाँति सुखपूर्वक यात्रा करता है।
संयम