Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
विनम्रता

अपने चैतन्य की विशुद्धि से अपना लाभ मानने वाला कभी प्रशंसा के शब्दों में हर्ष की आकुलता और निंदा के शब्दों में विवाद की आकुलता नहीं कर सकता।

One who counts his gain in the purity of his own consciousness can never feel the agitation of delight in words of praise nor the agitation of dispute in words of censure.

— आराध्य सूत्र · #435

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जीवन जीने का आनंद संघर्ष में नहीं समर्पण से मिलता हैं जैसे विभीषण ने संघर्ष नहीं समर्पण किया, तो राम ने उसको लंका का राजा बना दिया, रावण ने संघर्ष किया तो मिट्टी में मिला दिया।
विनम्रता