Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
संयम

जो सुखदायी परिस्थिति में दूसरों की सेवा करता है तथा दुःखदायी परिस्थिति में दुःखी नहीं होता अर्थात् सुख की इच्छा नहीं करता वह संसार-बन्धन से सुगमता पूर्वक मुक्त हो जाता है।

One who serves others in happy circumstances and does not grieve in painful ones — that is, does not crave happiness — is easily freed from worldly bondage.

— आराध्य सूत्र · #390

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मनुष्य का शरीर रथ है, बुद्धि सारथी है और इन्द्रियाँ इसके घोड़े हैं। इसको वश में करके साधना करने वाला चतुर एवं धीर पुरुष काबू में किए हुए घोड़ों से सारथी की भाँति सुखपूर्वक यात्रा करता है।
संयम