Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भाग 1 · अध्याय 17

खुश मिजाज-हाजिर जवाब

186 सूत्र · पृष्ठ 4 / 4

दुःख आ पड़ने पर मुस्कुराओ उसका सामना करके विजयी होने का साधन इसके समान और कोई नहीं है।
पुरुषार्थ
जो लुट जाने पर भी मुस्कुराता है, वह चोर का दिल चुरा लेता है।
पुरुषार्थ
किसी कार्य के लिए कला एवं विज्ञान ही पर्याप्त नहीं है, उसमें धैर्य की भी आवश्यकता है।
पुरुषार्थ
धैर्यवान और बुद्धिमान मनुष्य को बहुविध शोक, विलाप और रुदन सभी अवस्थाओं में त्याग देने योग्य है।
पुरुषार्थ
धीर पुरुष कार्य प्रारम्भ कर दृढ़ता से करते हैं, छोड़ते नहीं हैं।
पुरुषार्थ
शक्ति भय के अभाव में रहती है, न कि मांस या पुट्ठों के गुणों में जो कि हमारे शरीर में होते हैं।
पुरुषार्थ