Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
अनासक्ति

अब मेरे मन में नहीं है किञ्चित इच्छा, इसलिये धारण कर रहा हूँ मैं मुनि दीक्षा अर्थात् जिनके मन में सांसारिक कोई इच्छा नहीं रह जाती है वे मुनि दीक्षा लेकर आत्म कल्याण करते हैं।

'Now there is not the least desire in my mind, so I take up Muni initiation' — that is, those in whose mind no worldly desire remains take Muni Diksha and accomplish the welfare of the soul.

— आराध्य सूत्र · #32

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किसी वस्तु के संयोग के लिए शोक करना इसलिए व्यर्थ है क्योंकि संयोग में शान्ति और स्वाधीनता नहीं है किसी वस्तु के वियोग में शोक करना इसलिए व्यर्थ है क्योंकि पर की रक्षा अपने अधीन नहीं है व पर का अपने से तादात्म्य नहीं है तथा वियोग में अपने स्वरूप की हानि भी नहीं है।
अनासक्ति
धर्म कथा सुनते समय, श्मशान में शवदाह की ज्वाला देखते समय और रोग से सन्तप्त रोगी के कष्ट का अनुभव करते समय मानव हृदय में जो संसार से विरक्त होने की बुद्धि पैदा होती है, यदि वह मनोदशा मस्तिष्क में क्षणिक न रहे स्थिर हो जाये तो मनुष्य संसारी मायाजाल से शीघ्र ही मुक्ति पा लेता है।
अनासक्ति