Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
समाधि

बारह वर्ष की सल्लेखना- क्षपक प्रथम के चार वर्षों में काय क्लेश तप करता है, आगे चार वर्षों में षट् रसों का त्याग करता हुआ शरीर कृश करता है, आगे दो वर्ष काँजी का भोजन, स्वाद रहित भोजन करता है, आगे एक वर्ष आचाम्ल भोजन, आगे छह माह मध्यम तप से, अन्तिम छह माह उत्कृष्ट तप करता है।

Twelve-year Sallekhana: in the first four years the aspirant practises bodily austerity; in the next four he thins the body by giving up the six tastes; the next two years he takes gruel and tasteless food; the following year achamla (sour, restricted) food; the next six months moderate austerity; and the final six months the highest austerity.

— आराध्य सूत्र · #9

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बालक जन्मता है तो वह बड़ा होगा कि नहीं, पढ़ेगा कि नहीं, उसका विवाह होगा कि नहीं, उसके बाल-बच्चे होंगे कि नहीं, उसके पास धन होगा कि नहीं आदि सब बातों में सन्देह है, पर वह मरेगा कि नहीं, इसमें कोई संदेह नहीं है।
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