Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
समाधि

पण्डित मरण के तीन भेद हैं-1.भक्त प्रत्याख्यान मरण- बारह वर्ष तक अपने शरीर की सेवा स्वयं कर सकते हैं एवं पर से करा सकते हैं, 2.इङ्गिनीमरण- स्वयं की सेवा स्वयं करते हैं दूसरों से नहीं कराते हैं, 3.प्रायोपगमन मरण- न स्वयं की सेवा स्वयं करते हैं न पर से सेवा करवाते हैं।

The pandita death is of three kinds: 1. Bhakta-pratyakhyana death — for up to twelve years one may tend one's own body and also have it tended by others; 2. Ingini death — one tends oneself but does not let others do so; 3. Prayopagamana death — one neither tends oneself nor lets others tend one.

— आराध्य सूत्र · #7

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बालक जन्मता है तो वह बड़ा होगा कि नहीं, पढ़ेगा कि नहीं, उसका विवाह होगा कि नहीं, उसके बाल-बच्चे होंगे कि नहीं, उसके पास धन होगा कि नहीं आदि सब बातों में सन्देह है, पर वह मरेगा कि नहीं, इसमें कोई संदेह नहीं है।
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