Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
ध्यान

स्वदोषमूलं स्वसमाधि तेजसा। निनाय यो निर्दय भस्मसात् क्रियां।।

हे भगवन्! आपने अपने दोषों को ध्यान के तेज से भस्म कर दिया था।

O Lord! By the fire of your own meditation you mercilessly reduced the very root of your faults to ashes.

— आराध्य सूत्र · #4

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