Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
अनासक्ति

दिगम्बरत्व कोई वेश नहीं है, इसमें सब कुछ छोड़ना होता है, भीतर से भी और बाहर से भी, प्रकृति प्रदत्त वीतराग रूप है। अन्य धर्मों के लोग ओढ़ते हैं, जिन धर्म के लोग छोड़ते हैं।

Digambar-hood is not a costume; in it one must give up everything, within and without — it is the nature-given form of dispassion. People of other faiths put things on; people of the Jina's faith take things off.

— आराध्य सूत्र · #9

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किसी वस्तु के संयोग के लिए शोक करना इसलिए व्यर्थ है क्योंकि संयोग में शान्ति और स्वाधीनता नहीं है किसी वस्तु के वियोग में शोक करना इसलिए व्यर्थ है क्योंकि पर की रक्षा अपने अधीन नहीं है व पर का अपने से तादात्म्य नहीं है तथा वियोग में अपने स्वरूप की हानि भी नहीं है।
अनासक्ति
धर्म कथा सुनते समय, श्मशान में शवदाह की ज्वाला देखते समय और रोग से सन्तप्त रोगी के कष्ट का अनुभव करते समय मानव हृदय में जो संसार से विरक्त होने की बुद्धि पैदा होती है, यदि वह मनोदशा मस्तिष्क में क्षणिक न रहे स्थिर हो जाये तो मनुष्य संसारी मायाजाल से शीघ्र ही मुक्ति पा लेता है।
अनासक्ति