Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
ज्ञान

ज्ञानं यत्र पुरःसरं सहचरी, लज्जा तपः सम्बलं, चारित्रं शिविका निवेशनभुवः, स्वर्गा गुणा रक्षकाः। पन्थाश्च प्रगुणः शमाम्बुबहल, श्छाया दयाभावना, यानं तं मुनिमापयेदभिमतं, स्थानं विना विप्लवैः।।

ज्ञान जहाँ पर प्रमुख है, लज्जा सहचारिणी है, तप नाशता है, चारित्र पालकी है और बीच में रहने का स्थान स्वर्ग है, गुण रक्षक हैं, सरल मार्ग है, शान्ति रूपी जल है, दया की भावना ही छाया है, ऐसे मार्ग में गमन करने वाले मुनि विना विघ्न के अपने अभीष्ट स्थान मोक्ष को प्राप्त कर लेते हैं।

Where knowledge leads the way, modesty is the companion, austerity the provision, conduct the palanquin, heaven the resting-place, the virtues the guards, the road straight, tranquillity the water, and compassion the shade — an ascetic travelling such a road reaches his desired destination, liberation, without any obstacle.

— आराध्य सूत्र · #1

इसी विषय के और सूत्र

सभी ज्ञान →