Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
अनासक्ति

रामचन्द्र जी का मोह हटा तो लक्ष्मण के मृत शरीर को छोड़ने में देर नहीं लगी, शत्रुघ्न से कहा! भैया राज्य सम्भालो, शत्रुघ्न ने कहा जो राज का लोभी हो उसे दो, मैं तो मुनि बनूँगा।

When Ramachandra's delusion lifted, he wasted no time in letting go of Lakshmana's dead body. He said to Shatrughna, 'Brother, take the kingdom.' Shatrughna replied, 'Give it to whoever is greedy for a throne; I shall become a monk.'

— आराध्य सूत्र · #48

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किसी वस्तु के संयोग के लिए शोक करना इसलिए व्यर्थ है क्योंकि संयोग में शान्ति और स्वाधीनता नहीं है किसी वस्तु के वियोग में शोक करना इसलिए व्यर्थ है क्योंकि पर की रक्षा अपने अधीन नहीं है व पर का अपने से तादात्म्य नहीं है तथा वियोग में अपने स्वरूप की हानि भी नहीं है।
अनासक्ति
धर्म कथा सुनते समय, श्मशान में शवदाह की ज्वाला देखते समय और रोग से सन्तप्त रोगी के कष्ट का अनुभव करते समय मानव हृदय में जो संसार से विरक्त होने की बुद्धि पैदा होती है, यदि वह मनोदशा मस्तिष्क में क्षणिक न रहे स्थिर हो जाये तो मनुष्य संसारी मायाजाल से शीघ्र ही मुक्ति पा लेता है।
अनासक्ति