Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
ध्यान

वैराग्यं तत्त्वविज्ञानं, नैर्ग्रन्थ्यं समचित्तता। परिषहजयश्चेति, पञ्चैते ध्यानहेतवः।।

वैराग्य, तत्त्वज्ञान, निर्ग्रंथ अवस्था, समता और परीषह जय ये पाँच ध्यान के साधन हैं।

Detachment, knowledge of the reals, the naked (nirgrantha) state, equanimity and conquest of afflictions—these five are the means of meditation.

— आराध्य सूत्र · #4

इसी विषय के और सूत्र

सभी ध्यान →