Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
ध्यान

जगत्कायस्वभावौ वा संवेग वैराग्यार्थम्

'जगत्कायस्वभावौ वा संवेग वैराग्यार्थम्'-इन दो में बारह भावनाएँ आ जाती हैं या पूरा भावना अधिकार आ जाता है।

'Jagat-kaya-svabhavau va samvega-vairagyartham'—within these two the twelve reflections are included, or the whole topic of reflection is covered.

— आराध्य सूत्र · #2

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