Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
अनासक्ति

एक स्त्री पुत्रादि का राग, दूसरा पञ्च परमेष्ठी का राग, किसको छोड़ना? एक बुद्धि पूर्वक छोड़ना, दूसरा छूट जाएगा, एक आग है, दूसरा शीतल छाया है, एक का राग नरक तक ले जा सकता है सुभौम चक्रवर्ती की तरह और दूसरा सर्वार्थसिद्धि तक ले जा सकता है नकुल, सहदेव की तरह।

One is attachment to wife, son and the like; another is attachment to the five Supreme Beings—which to give up? The first must be given up deliberately; the second will fall away on its own. One is fire, the other cool shade; the first attachment can lead to hell like Subhaum Chakravarti, the second can lead to Sarvarthasiddhi like Nakul and Sahadev.

— आराध्य सूत्र · #12

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किसी वस्तु के संयोग के लिए शोक करना इसलिए व्यर्थ है क्योंकि संयोग में शान्ति और स्वाधीनता नहीं है किसी वस्तु के वियोग में शोक करना इसलिए व्यर्थ है क्योंकि पर की रक्षा अपने अधीन नहीं है व पर का अपने से तादात्म्य नहीं है तथा वियोग में अपने स्वरूप की हानि भी नहीं है।
अनासक्ति
धर्म कथा सुनते समय, श्मशान में शवदाह की ज्वाला देखते समय और रोग से सन्तप्त रोगी के कष्ट का अनुभव करते समय मानव हृदय में जो संसार से विरक्त होने की बुद्धि पैदा होती है, यदि वह मनोदशा मस्तिष्क में क्षणिक न रहे स्थिर हो जाये तो मनुष्य संसारी मायाजाल से शीघ्र ही मुक्ति पा लेता है।
अनासक्ति