जह भारवहो पुरिसो, वहइ भरं गेहिऊण कावलियं। एमेव वहइ जीवो, कम्मभरं कायकावलियं।।
जिस प्रकार भार ढोने वाला पुरुष कांवर के द्वारा भार ढोता है, उसी प्रकार संसारी जीव शरीर रूपी कांवर के द्वारा कर्मों के भार को ढोता है।
Just as a burden-bearing man carries a load by means of a yoke, so the transmigrating soul carries the load of karmas by means of the body as a yoke.
— आराध्य सूत्र · #44
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