Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
प्रकृति

पुढवी आदि चउण्हं केवलि आहार देव णिरयंगा। अपदिट्ठिदा णिगोदेहिं, पदिट्ठिदंगा हवे सेसा।।

पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, केवली, आहारकशरीर, देव और नारकियों के शरीर में निगोदिया जीव नहीं होते हैं, शेष सभी जीवों के शरीर में निगोदिया जीव होते हैं।

In the bodies of earth, water, fire, air, the Kevali, the aharaka body, gods and hell-beings there are no nigoda souls; in the bodies of all remaining beings there are nigoda souls.

— आराध्य सूत्र · #38

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