Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
विवेक

काँटे का पैनापन निसर्गज है, बाण का पैनापन अधिगमज है, क्रोध की ललाई अधिगमज है, क्षमाभाव निसर्गज है, निज आत्मा को निज में लगाना निसर्गज है।

A thorn's sharpness is innate, an arrow's sharpness is acquired; the redness of anger is acquired, the disposition of forgiveness is innate; to engage one's own soul in itself is innate.

— आराध्य सूत्र · #22

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प्रकृति ने सूर्योदय, सूर्यास्त, गर्मी, बरसात, ठंड सब का समय निश्चित कर रखा है केवल मनुष्य को ही हर बात की छूट दे रखी है, कब सोना, कब जागना, क्या करना सब कुछ स्वयं मनुष्य के हाथ में है वह सब कुछ करने में स्वतंत्र है।
विवेक