Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
अनासक्ति

रामचन्द्रजी सम्यग्दृष्टि थे तो भी कहते थे कि मैं सीता और लक्ष्मण के विना जीवित नहीं रह सकता, सीता की दीक्षा के बाद और लक्ष्मण की मृत्यु के बाद भी राम जीवित रहे, जैसे भारतीय रेल को अपनी सम्पत्ति कहता है लेकिन मानता नहीं, माता-पिता को अपने कहता है पर मानता नहीं, यदि कोई अपने या पड़ोसी के मां-बाप को मार डाले तो भी धारा 302 का केस बनता है।

Ramchandra was a right-believer, yet he would say he could not live without Sita and Lakshman; still, Rama lived on after Sita's initiation and after Lakshman's death. As one calls the Indian Railway one's own property but does not truly believe it, and calls one's parents one's own but does not truly hold it—if someone kills one's own or a neighbour's parents, a Section 302 case is still filed.

— आराध्य सूत्र · #41

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किसी वस्तु के संयोग के लिए शोक करना इसलिए व्यर्थ है क्योंकि संयोग में शान्ति और स्वाधीनता नहीं है किसी वस्तु के वियोग में शोक करना इसलिए व्यर्थ है क्योंकि पर की रक्षा अपने अधीन नहीं है व पर का अपने से तादात्म्य नहीं है तथा वियोग में अपने स्वरूप की हानि भी नहीं है।
अनासक्ति
धर्म कथा सुनते समय, श्मशान में शवदाह की ज्वाला देखते समय और रोग से सन्तप्त रोगी के कष्ट का अनुभव करते समय मानव हृदय में जो संसार से विरक्त होने की बुद्धि पैदा होती है, यदि वह मनोदशा मस्तिष्क में क्षणिक न रहे स्थिर हो जाये तो मनुष्य संसारी मायाजाल से शीघ्र ही मुक्ति पा लेता है।
अनासक्ति