Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
विवेक

जैसे मन्दिर के सामने की फोटो मन्दिर नहीं है बल्कि भीतर-बाहर, आजू-बाजू सभी दीवालों की फोटो मिलाने से मन्दिर कहलाता है, उसी प्रकार वस्तु स्वरूप को समझना चाहिए।

Just as a photo of the temple's front is not the temple, but only when the inside, outside and all surrounding walls are combined is it called a temple, so too should the nature of a thing be understood.

— आराध्य सूत्र · #32

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प्रकृति ने सूर्योदय, सूर्यास्त, गर्मी, बरसात, ठंड सब का समय निश्चित कर रखा है केवल मनुष्य को ही हर बात की छूट दे रखी है, कब सोना, कब जागना, क्या करना सब कुछ स्वयं मनुष्य के हाथ में है वह सब कुछ करने में स्वतंत्र है।
विवेक