Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
विवेक

नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि, नैनं दहति पावकः। नैव क्लेदयन्त्यापः, नैव शोषति मारुतः।।

निश्चय- अर्जुन ने युद्ध क्षेत्र में कृष्णजी से पूँछा, किस-किस के साथ युद्ध करना है ? कृष्णजी ने बताया भीष्म पितामह, द्रोणाचार्य, दुर्योधन आदि के साथ, अर्जुन ने कहा रथ वापस ले चलो, जिनकी गोद में खेले, उनसे युद्ध कैसे करेंगे ? तब कृष्ण जी ने निश्चय का सहारा लेकर समझाया था- अर्थात्- आत्मा शस्त्र से छिदती नहीं है, आग से जलती नहीं है, पानी से भीगती नहीं है और वायु से सूखती नहीं है, इसलिए हे अर्जुन ! युद्ध करो।

The absolute: on the battlefield Arjuna asked Krishna with whom he must fight; Krishna named Bhishma, Drona, Duryodhana and others. Arjuna said, 'Turn the chariot back; how can I fight those in whose lap I played?' Then Krishna, taking recourse to the absolute standpoint, explained — the soul is not cut by weapons, not burnt by fire, not wetted by water, and not dried by wind; therefore, O Arjuna, fight.

— आराध्य सूत्र · #22

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प्रकृति ने सूर्योदय, सूर्यास्त, गर्मी, बरसात, ठंड सब का समय निश्चित कर रखा है केवल मनुष्य को ही हर बात की छूट दे रखी है, कब सोना, कब जागना, क्या करना सब कुछ स्वयं मनुष्य के हाथ में है वह सब कुछ करने में स्वतंत्र है।
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