Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
विवेक

व्यवहार- कृष्ण जी शान्तिदूत बनकर दुर्योधन के पास गये, कहा पाण्डव पाँच गाँव में सन्तुष्ट हैं, युद्ध न करो, दुर्योधन ने कृष्णजी को फटकारते हुये बन्दी बनाने का आदेश दिया, तब कृष्णजी ने विराट रूप बनाकर दुर्योधन से कहा तू कौन सी मूली की जड़ है ? देखते-देखते उखाड़ कर फेक दूँगा, इस प्रकार व्यवहार नय से समझाया था।

The practical: Krishna went to Duryodhana as an envoy of peace and said, 'The Pandavas are content with five villages; do not make war.' Duryodhana rebuked him and ordered him seized; then Krishna assumed his cosmic form and said to Duryodhana, 'What kind of radish-root are you? In an instant I could uproot and fling you away.' Thus he explained through the practical standpoint.

— आराध्य सूत्र · #21

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प्रकृति ने सूर्योदय, सूर्यास्त, गर्मी, बरसात, ठंड सब का समय निश्चित कर रखा है केवल मनुष्य को ही हर बात की छूट दे रखी है, कब सोना, कब जागना, क्या करना सब कुछ स्वयं मनुष्य के हाथ में है वह सब कुछ करने में स्वतंत्र है।
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